दरअसल 1 जनवरी से 2 फरवरी के बीच इंदौर क्राइम ब्रांच में साइबर फ्रॉड के 150 से अधिक मामले सामने आए हैं। इन मामलों में साइबर ठगों ने APK फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल फोन को हैक किया और करीब 15 लाख रुपये की ठगी की है। ठग खुद को ट्रैफिक के अधिकारी, बैंक अधिकारी, कूरियर सर्विस या किसी जान-पहचान वाले के रूप में पेश कर APK फाइल भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को डाउनलोड करता है, तभी मोबाइल का पूरा कंट्रोल ठगों के हाथ में चला जाता है। इसके बाद बैंकिंग डिटेल्स चुराकर खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच सक्रिय रूप से जांच कर रही है और APK फाइल के जरिए ठगी करने वाले आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। वहीं क्राइम ब्रांच ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड न करें और सतर्क रहें।

एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि- अगर साइबर धोखाधड़ी हो गई है, तो समय पर रिपोर्टिंग पैसे की रिकवरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
सबसे पहले 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
रिपोर्ट के बाद मिलने वाले पावती नंबर को नोट करें
अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से मार्गदर्शन लें
ज़रुरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से बैंक से राशि को होल्ड/रिलीज़ करवाया जा सकता है
जितनी जल्दी रिपोर्ट, उतनी ज्यादा रिकवरी की संभावना





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