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विदाई से पहले भारी बारिश का एक और दौर, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम होगा सक्रिय

प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा, 4.3 इंच पानी की और जरूरत; इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम

भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 19 सितंबर के बाद प्रदेश में नया मौसम सिस्टम सक्रिय हो सकता है। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा तो प्रदेश में बारिश का सीजन सामान्य कोटे के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकता है। फिलहाल प्रदेश में सामान्य औसत 37.3 इंच के मुकाबले करीब 33 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अब लगभग 4.3 इंच बारिश की जरूरत है।

मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन आधिकारिक तौर पर 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। हालांकि कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक भी प्रदेश से विदा होता है। इस बार सितंबर के आखिरी सप्ताह में मानसून की विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

17 से 21 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश की गतिविधियां अधिक व्यापक हो सकती हैं। वहीं 18 से 21 सितंबर के बीच पूर्वी मध्यप्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) सक्रिय रहा। इसके साथ मानसून ट्रफ की गतिविधियां भी देखने को मिलीं, लेकिन इसका असर प्रदेश में बहुत तेज बारिश के रूप में नहीं दिखाई दिया। राजधानी भोपाल में दिनभर धूप खिली रही। इंदौर और उज्जैन में भी मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहा।

प्रदेश में अब तक 88.5 प्रतिशत बारिश

मानसून सीजन खत्म होने में करीब दो सप्ताह का समय बाकी है। मंगलवार तक प्रदेश में लगभग 33 इंच यानी सामान्य बारिश का 88.5 प्रतिशत पानी बरस चुका है। प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। इन जिलों में अब होने वाली बारिश को सामान्य कोटे से अतिरिक्त माना जाएगा। वहीं कई जिलों में अभी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हुआ है। सामान्य से ज्यादा बारिश वाले जिलों में भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इसके उलट इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है। अलीराजपुर में स्थिति और कमजोर रही है, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी अब तक नहीं हो पाई है। वहीं निवाड़ी में सामान्य से करीब 49 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है।

भोपाल में लगातार चार साल से सामान्य से ज्यादा बारिश

राजधानी भोपाल में सितंबर की औसत बारिश करीब 7 इंच मानी जाती है। पिछले कई वर्षों से सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। भोपाल में पूरे सितंबर महीने में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 1961 में बना था, जब महीनेभर में 30 इंच से अधिक पानी बरसा था। वहीं 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश 2 सितंबर 1947 को दर्ज की गई थी।

सितंबर में भोपाल में औसतन करीब 8 से 10 दिन बारिश होती है। इस दौरान सामान्य तौर पर दिन का तापमान 31.3 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है।

इंदौर में सितंबर की बारिश का रिकॉर्ड 30 इंच

इंदौर में भी सितंबर के दौरान भारी बारिश के पुराने रिकॉर्ड मौजूद हैं। सितंबर महीने में यहां सर्वाधिक करीब 30 इंच बारिश का रिकॉर्ड दर्ज है, जो वर्ष 1954 में बना था। वहीं 20 सितंबर 1987 को इंदौर में 24 घंटे के दौरान करीब पौने 7 इंच बारिश हुई थी। सामान्य तौर पर सितंबर में इंदौर में करीब 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार बारिश के दिनों की संख्या 15 या उससे अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है।

जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड

जबलपुर में सितंबर महीने में भी मानसून सक्रिय रहने पर अच्छी बारिश होती है। यहां 20 सितंबर 1926 को 24 घंटे के भीतर करीब साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है। पूरे सितंबर महीने में सर्वाधिक करीब 32 इंच बारिश वर्ष 1926 में दर्ज की गई थी। जबलपुर में सितंबर के दौरान औसतन करीब 10 दिन बारिश होती है। महीने की सामान्य बारिश करीब साढ़े 8 इंच है। पिछले तीन वर्षों से यहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा रही है।

उज्जैन में सितंबर में ही पूरा हो चुका है पूरे मानसून का कोटा

उज्जैन में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 34.81 इंच है। यहां सितंबर की बारिश कई बार पूरे मानसून के कोटे को प्रभावित कर चुकी है। वर्ष 1961 में सितंबर महीने में ही करीब 1089 मिमी यानी 43 इंच बारिश दर्ज की गई थी। उज्जैन में 24 घंटे में सर्वाधिक करीब साढ़े 5 इंच बारिश 27 सितंबर 1961 को दर्ज हुई थी। सितंबर में यहां सामान्य बारिश करीब पौने 7 इंच रहती है, लेकिन पिछले दो वर्षों से 12 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस महीने औसतन करीब 7 दिन बारिश होती है।

मानसून की विदाई से पहले सिस्टम पर नजर

फिलहाल मौसम विभाग और विशेषज्ञों की नजर 19 सितंबर के बाद सक्रिय होने वाले संभावित नए सिस्टम पर है। इसकी ताकत और दिशा के आधार पर प्रदेश में बारिश की स्थिति तय होगी। यदि सिस्टम प्रभावी रहा तो सामान्य से कम बारिश वाले जिलों में बारिश का आंकड़ा बढ़ सकता है और प्रदेश का कुल बारिश कोटा भी सामान्य के करीब पहुंच सकता है।

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