शिवाजी मार्केट की 126 दुकानों पर फिलहाल कार्रवाई पर रोक
इंदौर संकेत प्रतिनिधि
इंदौर नगर निगम मुख्यालय के सामने स्थित शिवाजी मार्केट की 126 दुकानों पर फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई नहीं हो सकेगी। मेट्रो प्रोजेक्ट और प्रस्तावित रिवर साइड कॉरिडोर के लिए दुकानों को हटाने की निगम की कवायद के खिलाफ दुकानदारों ने हाई कोर्ट का रुख किया है।
कोर्ट ने मामले में निगम की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा रखी है। मंगलवार को प्रकरण में अंतिम बहस प्रस्तावित थी, लेकिन कोर्ट का समय समाप्त होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। एसडीएम के आदेश से शुरू हुआ विवाद अधिवक्ता मनीष यादव के अनुसार फरवरी 2026 में एसडीएम कोर्ट ने लोक परिसर बेदखली अधिनियम के तहत शिवाजी मार्केट के दुकानदारों को दुकानें खाली करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ दुकानदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 26 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए दुकानदारों को एसडीएम के आदेश के खिलाफ संभागायुक्त के समक्ष अपील और स्थगन आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
संभागायुक्त के समक्ष अपील के बाद फिर बढ़ा विवाद
कोर्ट के निर्देश के बाद दुकानदारों ने 27 अप्रैल को संभागायुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत कर दी। मामले में दुकानदारों की सुनवाई के बाद संभागायुक्त ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। बाद में आदेश जारी होने के बाद नगर निगम ने दुकानों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी। इसकी जानकारी मिलने पर दुकानदारों ने फिर हाई कोर्ट की शरण ली।
30 सितंबर तक निगम नहीं कर सकेगा कार्रवाई
दुकानदारों की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने हाई कोर्ट में दोबारा याचिका प्रस्तुत की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगा दी। मंगलवार को इसी मामले में अंतिम बहस होनी थी, लेकिन समयाभाव के कारण सुनवाई टल गई।
डीआरटी की मांग पर केंद्र का विरोध
इंदौर में डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) स्थापित करने की मांग को लेकर दायर याचिका का केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में विरोध किया है। केंद्र ने कहा कि इंदौर से जुड़े ऋण वसूली के मामलों की सुनवाई के लिए जबलपुर डीआरटी का क्षेत्राधिकार निर्धारित है। वहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, हाइब्रिड सुनवाई और ई-फाइलिंग की सुविधा उपलब्ध होने से पक्षकारों और अधिवक्ताओं को हर सुनवाई के लिए जबलपुर आने की आवश्यकता नहीं है। रिट याचिका क्रमांक 25705/2026 में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 20 अगस्त 2026 को प्रारंभिक जवाब दाखिल किया है। इसमें बताया गया कि देश में बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़े ऋण वसूली मामलों के निराकरण के लिए 39 डीआरटी और पांच डेब्ट रिकवरी अपीलीय ट्रिब्यूनल ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) कार्यरत हैं। केंद्र ने बताया कि सभी डीआरटी और डीआरएटी में अप्रैल 2020 से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है। ई-डीआरटी पोर्टल के माध्यम से प्रकरण ऑनलाइन दाखिल किए जा सकते हैं। 31 जनवरी 2023 से सभी डीआरटी में ई-फाइलिंग अनिवार्य है। दैनिक आदेश, अंतिम आदेश और कारण सूची भी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है।





Total Users : 32078
Leave a comment