समर्पण और निजी प्रयासों से संवारा कुलकर्णी का भट्टा स्थित शासकीय माध्यमिक स्कूल क्रमांक 51
आशीष गुप्ता : 9425064357
इंदौर। दैनिक इंदौर संकेत। शिक्षक दिवस पर विभिन्न जिलों के शासकीय विद्यालय का कायाकल्प करने वाले शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से नवाजा जा रहा है। यह सम्मान निश्चित रूप से उन शिक्षकों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने कर्तव्य से आगे बढ़कर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में जुटे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी इंदौर के ‘शासकीय मिडिल स्कूल क्रमांक 51, कुलकर्णी का भट्टा’ की भी है, जहां प्रधानाध्यापिका अनुलता सिंह और गत 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हुए शिक्षक राजेंद्र आचार्य ने बिना किसी पुरस्कार, सम्मान या पहचान की अपेक्षा किए अपने समर्पण और सतत प्रयासों से विद्यालय को नई पहचान दिलाने का काम किया है।
गत दो दशक से इस स्कूल में पदस्थ इस जोड़ी ने इंदौर के शैक्षणिक दृष्टि से अति पिछड़े इलाके कुलकर्णी का भट्टा, जहां आम आदमी जाने में भी घबराता था, वहां पर इन दोनों टीचरों ने अपनी सकारात्मक सोच से गली-बस्ती के बच्चों में शिक्षा की अलख जगा दी। जहां के अशिक्षित अभिभावक जिनके लिए शिक्षा की उपयोगिता का कोई मायने नहीं रहता था, वहां के विद्यार्थी अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्थान पा रहे हैं।
सरकारी स्कूलों की चर्चा को अक्सर जर्जर भवनों, संसाधनों की कमी और कमजोर व्यवस्थाओं के संदर्भ में होती है, लेकिन इन तमाम परिस्थितियों के बीच इन दोनों शिक्षकों की जोड़ी ने समस्याओं को अपनी मजबूरी नहीं बनने देते। शिक्षक ने बताया कि नियमित पढ़ाई के साथ बच्चों को जीवन उपयोगी स्किल्स पर भी ध्यान दिया जाता है। स्कूल में 100 प्रतिशत नामांकन और ठहराव दर्ज हुआ, वहीं आसपास के लगभग आधा दर्जन निजी स्कूल बंद हो गए।
अपने स्वयं के व्यय से अनेक बार यहां के विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने वाले दोनों ही शिक्षकों ने अपने समर्पण और कर्तव्य निष्ठा को अपनी कार्यशैली का आधार बनाया। विद्यालय की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने से लेकर बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल तैयार करने तक दोनों शिक्षकों ने लगातार प्रयास किए। धीरे-धीरे इन प्रयासों का असर विद्यालय के वातावरण और बच्चों के विकास में दिखाई देने लगा।
जनप्रतिनिधि ने भी मिलाई ताल
बहुत कम ऐसे क्षेत्र देखने को मिलते हैं जब सरकारी शिक्षक और वहां के जनप्रतिनिधि का जबरदस्त तालमेल दिखाई देता है। कुलकर्णी का भट्टा स्कूल के पार्षद जीतू यादव और यहां के विधायक रमेश मेंदोला ने स्कूल के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानाध्यापिका अनुलता सिंह और शिक्षक राजेंद्र आचार्य के प्रयासों को सहयोग दिया। यही कारण है कि उनके इस सद्प्रयास के चलते ही आज अति पिछड़े इलाके का स्कूल जिले ही नहीं वरन् राज्य के टॉप टेन स्कूलों की श्रेणी का माना जाता है।
अधिकारियों की मिलती सराहना
सर्वशिक्षा अभियान भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को जब भी जिले के स्कूलों का निरीक्षण करवाना होता है तो जिले के अधिकारी उन्हें इस स्कूल में निरीक्षण करवाते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यहां के दोनों कुशल शिक्षक द्वारा संचालित व्यवस्थाएं किसी भी विशेष दिन का मोहताज नहीं रहती हैं। उक्त विद्यालय शैक्षणिक दृष्टि से हर मानक पर हमेशा खरा उतरता है। कहने का आशय यही है कि उक्त स्कूल का निरीक्षण करवाकर जिले के अधिकारी अपनी लाज बचा लेते हैं।

दोनों शिक्षकों की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने शिक्षण को केवल एक सरकारी नौकरी के रूप में नहीं देखा। उनके लिए विद्यालय की जिम्मेदारी बच्चों के भविष्य और समाज निर्माण से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि उन्होंने किसी विशेष अवसर, निरीक्षण की प्रतीक्षा किए बिना स्कूल की बेहतरी के लिए निरंतर काम किया।
इन्होंने जिस तरह अपने निजी प्रयासों से विद्यालय का कायाकल्प किया, वह निश्चित रूप से शिक्षा जगत के लिए गौरव की बात है। लेकिन इसी के साथ इंदौर के इस सरकारी स्कूल की कहानी यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर ऐसे कितने शिक्षक हैं, जो वर्षों से बिना किसी सम्मान और पुरस्कार की अपेक्षा किए अपने विद्यालयों को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं। इंदौर की श्रीमती अनुलता सिंह और राजेंद्र आचार्य जैसे शिक्षकों के प्रयास भी किसी सम्मान से कम नहीं हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि किसी के कार्य को मंच पर सम्मान मिलता है और कोई बिना मंच, बिना पुरस्कार और बिना किसी अपेक्षा के हर दिन अपना काम करते हुए बच्चों के भविष्य में बदलाव की इबारत लिखता रहता है।






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