सोशल मीडिया पर नए अभियान की चर्चा, शुद्ध पेट्रोल के विकल्प की मांग तेज
नई दिल्ली। देश में पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर व्यंग्य और मीम्स के जरिए शुरू हुए अभियान लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। पहले कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) नाम से परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं को लेकर युवाओं का विरोध अभियान वायरल हुआ था। अब उसी तर्ज पर इंटरनेट पर एक नया अभियान ‘ई20 जनता पार्टी’ तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
इस नए अभियान का केंद्र बिंदु शिक्षा या रोजगार नहीं, बल्कि वाहनों में इस्तेमाल होने वाला ई20 ईंधन है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वाहन मालिक और ऑटोमोबाइल प्रेमी पोस्ट, मीम्स और वीडियो साझा करते हुए यह मांग उठा रहे हैं कि सरकार नागरिकों को ई20 पेट्रोल के साथ-साथ 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध कराए।
क्या है ई20 पेट्रोल?
ई20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। सरकार का उद्देश्य एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। हालांकि, कई पुराने वाहनों के मालिकों का कहना है कि उनकी गाड़ियों की तकनीक पूरी तरह ई20 के अनुकूल नहीं है।
सोशल मीडिया पर क्यों शुरू हुआ अभियान?
पिछले कुछ दिनों से एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर #E20JanataParty और इससे जुड़े कई हैशटैग तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। मीम्स के जरिए दावा किया जा रहा है कि यदि किसी वाहन निर्माता की ओर से केवल ई20 ईंधन की सलाह दी जाती है, तो उपभोक्ताओं को कम से कम शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए।
कई पोस्ट में यह भी कहा जा रहा है कि उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ लोग सरकार की एथेनॉल नीति का समर्थन करते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।
वाहन मालिकों की क्या है चिंता?
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि पुराने मॉडल की बाइक और कारों में ई20 ईंधन के लंबे समय तक उपयोग से इंजन, माइलेज और पार्ट्स पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती रही है। हालांकि, इस विषय पर वाहन निर्माता कंपनियां अलग-अलग मॉडल के अनुसार दिशा-निर्देश जारी करती हैं। इसलिए वाहन मालिक अपने वाहन की उपयोगकर्ता पुस्तिका (Owner’s Manual) के अनुसार ही ईंधन का चयन करने की सलाह भी दे रहे हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य आयातित तेल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। कई नई गाड़ियों को ई20 अनुकूल बनाकर बाजार में उतारा जा रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग और बढ़ाया जाएगा।
सोशल मीडिया पर बहस जारी
फिलहाल ‘ई20 जनता पार्टी’ कोई आधिकारिक राजनीतिक संगठन नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहा एक व्यंग्यात्मक और जनमत आधारित अभियान माना जा रहा है। इस अभियान ने ईंधन नीति, उपभोक्ता अधिकार और वाहन तकनीक को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ऑनलाइन अभियान कितना व्यापक जनसमर्थन हासिल करता है और नीति निर्माण पर इसका कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।




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