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कांग्रेस से भाजपा में गए नेता अब भी खाली हाथ

राजनीति में कब और कहाँ कौन सा ऊंट किस करवट बैठ जाए, यह कहना आज के दौर में मुश्किल है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस लगातार 20 साल से अधिक समय से सत्ता से बाहर है। हम बात कर रहे हैं इंदौर के कांग्रेस में रहे दिग्गज नेताओं की, जिन्होंने समय-समय पर कांग्रेस का खूब उपयोग किया। टिकट लेने से लेकर विधानसभा चुनाव लड़ने तक कांग्रेस पार्टी की जमकर खातिरदारी की, लेकिन कमलनाथ सरकार गिरने के बाद कांग्रेस के कई नेता धीरे-धीरे कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामना शुरू कर दिया, जिसमें इंदौर के कई दिग्गज नेता शामिल हैं।

पंकज संघवी, पूर्व विधायक विशाल पटेल, पूर्व विधायक संजय शुक्ला, अध्यक्ष क्रांति बम और शिक्षाविद नेता स्वप्निल कोठारी, जिन्होंने इंदौर शहर में कांग्रेस के लिए दमदारी से किला लड़ाया था, लेकिन 18 महीने बाद कमलनाथ सरकार गिरते ही इन नेताओं का कांग्रेस से मोह खत्म हो गया। पंकज संघवी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। महापौर से लेकर लोकसभा तक इन्होंने कई चुनाव लड़े हैं, लेकिन इनके नसीब में जीत नहीं आई। इतना ही नहीं पंकज के कैलाश से रिश्ते भी पारिवारिक रहे। इसी का फायदा उठाकर वह भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस द्वारा लोकसभा प्रत्याशी बनाए गए अक्षय कांति बम ने कांग्रेस का कम एन वक्त पर छोड़ी और पलटी लगाते कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। बम दिग्विजय सिंह के करीबी रहे हैं, लेकिन वर्तमान हालातों में कैलाश विजयवर्गीय के दाएं-बाएं नजर आते हैं।

पूर्व विधायक संजय शुक्ला के पिता से लेकर भाई तक पूरा परिवार भाजपाई है, लेकिन शुक्ला ने शुरू से ही कांग्रेस से राजनीति की। कमलनाथ सरकार में वह विधायक बने, लेकिन एक मामले में उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। विधायक रहते तब एक नंबर विधानसभा में शुक्ला ने जमकर पैसा बहाया, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय की उम्मीदवारी ने उन्हें 50,000 से अधिक वोटों से चुनाव हरा दिया।

पूर्व विधायक विशाल पटेल के पिता जगदीश पटेल देपालपुर से दो बार विधायक रहे हैं। दमदार नेताओं में जगदीश पटेल की गिनती होती थी। उसी तरह पर विशाल पटेल भी देपालपुर में विधायक बने, लेकिन संजय के साथ वह भी भाजपा में शामिल हो गए। संजय और विशाल रिश्ते में जीजा-साले हैं, प्रॉपर्टी व्यवसाय से लेकर खेती प्रोजेक्ट में दोनों पार्टनर भी हैं।

शिक्षाविद नेता स्वप्निल कोठारी कमलनाथ के भरोसेमंद नेता थे। पांच नंबर विधानसभा से टिकट भी मांग रहे थे, लेकिन वहां से पार्टी ने सत्यनारायण पटेल को उम्मीदवार बनाया। चुनाव बाद कोठारी ने भी कांग्रेस को राम-राम बोल दिया। जानकारी में पता चला है कि इंदौर के एक नेता ने कोठारी की सेटिंग मुख्यमंत्री से करवाई है। कोठारी के कई कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री को देखा गया।

सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस से भाजपा में गए नेताओं का भविष्य भाजपा में अब उज्ज्वल होगा या फिर स्थायी नेता बनकर केवल पार्टी की सेवा करेंगे, क्योंकि इन नेताओं को कांग्रेस ने पद प्रतिष्ठा के साथ विधायक, सांसद, महापौर तक के टिकट दिए थे। जीत-हार एक अलग विषय है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इन्हें सब कुछ दिया। इंदौर में भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की फौज है, पद पाने के लिए कई लंबी लाइन में लगे हैं, लेकिन कांग्रेसियों को क्या भाजपा भुना पाएगी? यह देखना अभी बाकी है।

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