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40 करोड़ के बिजली के बिल पर जागा नगर निगम, होगा भौतिक सत्यापन

इंदौर। नगर निगम के हजारों बिजली कनेक्शनों का उपयोग आखिर कौन कर रहा है? क्या सभी कनेक्शन वास्तव में निगम के काम आ रहे हैं या फिर कुछ रसूखदार लोग बिजली का निजी उपयोग कर रहे हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए नगर निगम ने अपने करीब 8 हजार बिजली कनेक्शनों का व्यापक सत्यापन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए निगम के सभी 23 विभागों को अपने-अपने बिजली कनेक्शनों के भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। सबसे ज्यादा कनेक्शन विद्युत विभाग के पास हैं। जानकारी के अनुसार सबसे अधिक बिजली कनेक्शन नगर निगम के विद्युत विभाग के पास हैं। इसके बाद जल यंत्रालय द्वारा सार्वजनिक बोरिंग, उद्यान विभाग की पानी की लाइट और बोरिंग, सामुदायिक भवनों, रैन बसेरों तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के बिजली कनेक्शन शामिल हैं, जिनका बिल नगर निगम नियमित रूप से भरता है।

हर महीने 40 करोड़ रुपए का बिजली बिल

नगर निगम हर महीने करीब 40 करोड़ रुपए का बिजली बिल चुकाता है। इसमें लगभग 25 करोड़ रुपए नर्मदा जलप्रदाय पंपिंग स्टेशनों की बिजली खपत पर खर्च होते हैं, जबकि शेष 15 करोड़ रुपए शहरभर के करीब 8 हजार कनेक्शनों के भुगतान में खर्च किए जाते हैं। अब निगम यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक कनेक्शन का उपयोग वास्तव में निगम के कार्यों के लिए ही हो रहा है या नहीं।

निजी उपयोग की आशंका

सूत्रों के मुताबिक आशंका जताई जा रही है कि कुछ बिजली कनेक्शनों का उपयोग नेताओं, उनके समर्थकों अथवा अन्य प्रभावशाली लोगों द्वारा किया जा रहा हो सकता है, जबकि उनका बिल नगर निगम भर रहा है। हाल के महीनों में सार्वजनिक बोरिंग पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं के कब्जे और कुछ उद्यानों व सामुदायिक भवनों पर विभिन्न संस्थाओं के कब्जे के मामले भी सामने आए थे। ऐसे में यदि सभी कनेक्शनों का भौतिक सत्यापन किया गया तो ऐसे कई कनेक्शन सामने आ सकते हैं, जिनका लाभ निजी लोग उठा रहे हैं जबकि खर्च नगर निगम के खजाने से किया जा रहा है।

भोपाल से मंगाई गई कनेक्शनों की सूची

नगर निगम के लेखा विभाग ने मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के भोपाल मुख्यालय से इंदौर के सभी बिजली कनेक्शनों की सूची मंगाई है। सूची मिलने के बाद अब संबंधित विभागों को भेजी जा रही है। प्रत्येक विभाग प्रमुख को अपने अधीन आने वाले बिजली कनेक्शनों का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

प्रमुख बिंदु

  • पहली बार विभागवार भौतिक सत्यापन होगा।
  • 40 करोड़ रुपए बिजली बिल नगर निगम चुकाता है।
  • 25 करोड़ रुपए सिर्फ जलदाय पंपिंग स्टेशनों की बिजली पर खर्च होते हैं।
  • 15 करोड़ रुपए 8 हजार बिजली कनेक्शनों पर खर्च होते हैं।
  • 23 विभागों को सभी बिजली कनेक्शनों की पुष्टि करनी होगी।
  • सबसे अधिक कनेक्शन नगर निगम के विद्युत विभाग के पास हैं।
  • सार्वजनिक बोरिंग, उद्यान, सामुदायिक भवन और रैन बसेरों के कनेक्शन भी जांचे जाएंगे।
  • अनियमित उपयोग और फर्जी भुगतान का खुलासा हो सकता है।
  • जांच के बाद बड़े स्तर पर बचत की संभावना जताई जा रही है।

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