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छावनी मंडी शिफ्ट करने को लेकर आईडीए और वन विभाग के बीच नहीं बन रही सहमति

इंदौर • छावनी अनाज मंडी के लिए मोरोद में वन विभाग से जमीन नहीं मिलने के जिसके बाद कृषि उपज मंडी प्रशासन का मोरोद मंडी बनाने का सपना अधर में ही अटक गया है। लंबे समय से कृषि उपज मंडी को शिफ्ट नहीं किया जा सका है।

बताया जा रहा है कि विकास प्राधिकरण ने कृषि उपज मंडी को मोरोद में बनाने से हाथ खींच लिए हैं, जिसके लिए आईडीए ने यह तर्क दिया कि वन विभाग से जमीन दिलाना कृषि उपज मंडी का कार्य है। लेकिन इसके पीछे जो कहानी सामने आई, वह आईडीए की छावनी कृषि उपज मंडी की जमीन को हथियाने की योजना पर पानी फिरने जैसी है।

सूत्रों का कहना है कि पूर्व में आईडीए ने कृषि उपज मंडी प्रशासन से पूर्व में यह अनुबंध किया था कि वह मोरोद में कृषि उपज मंडी को विकसित करके देंगे, जिसके एवज में छावनी उपज मंडी की जमीन आईडीए लेगा। लेकिन इस मंशा पर वर्तमान के मंडी सचिव ने पानी फेरते हुए आईडीए को दो टूक में जवाब दे दिया है कि वह छावनी मंडी की जमीन आईडीए को नहीं देंगे। यदि मोरोद में वन विभाग से जमीन मिलती है, तो मंडी प्रशासन ही मोरोद में मंडी बनवाने का कार्य कर लेगा। मंडी के इंजीनियर ही मोरोद में मंडी निर्माण करवाने का कार्य संभाल लेंगे।

छावनी उपज मंडी को मोरोद में शिफ्ट करने के बाद मंडी प्रशासन की मंशा है कि वह छावनी मंडी की बेशकीमती जमीन, जो शहर के बीचों-बीच स्थित है, पर मसाला मंडी बनाएं। शहर में फिलहाल कोई मसाला मंडी नहीं है। इस कारण किसानों को मसाला की उपज बेचने के लिए परेशान होना पड़ता है और व्यापारी उनके माल को सस्ते भाव में खरीदकर स्वयं ही मुनाफा कमाते हैं। इसके विपरीत मसाला की खेती करने वाले किसान स्वयं भी ठगे जा रहे हैं। प्रदेश में भोपाल और नीमच में ही मसाला मंडी है। इन्हें छोड़कर अन्य जिलों में कोई मसाला मंडी नहीं होने से किसान परेशान ही रहते हैं। यदि इंदौर में मसाला मंडी बनेगी, तो भविष्य में इससे शहर में मसाला कारोबार भी विकसित होगा।

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