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राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार, मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज

इंदौर। बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को बड़ी राहत मिली है। मेघालय हाईकोर्ट ने शिलांग की निचली अदालत द्वारा अप्रैल 2026 में दिए गए जमानत आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की जमानत निरस्त करने की अपील खारिज कर दी। जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की करीब दस दिन तक चली विस्तृत सुनवाई के बाद 10 जून को फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।

सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप है। यह मामला वर्ष 2025 में देशभर में चर्चा का विषय बना था।

प्रक्रियागत त्रुटि बनी जमानत की सबसे बड़ी वजह

शिलांग की एडिशनल डीसी (ज्यूडिशियल) कोर्ट ने सोनम को मुख्य रूप से इस आधार पर जमानत दी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के समय उन्हें सही कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने में विफल रही। अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े लगभग सभी दस्तावेजों में हत्या के लिए लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के स्थान पर धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था।

अदालत के अनुसार गिरफ्तारी मेमो, गिरफ्तारी के कारणों की चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो, आरोपी के अधिकारों की सूचना और केस डायरी सहित सभी दस्तावेजों में यही गलती दोहराई गई। किसी भी दस्तावेज में यह स्पष्ट नहीं था कि आरोपी को हत्या जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है।

कोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया कि यह केवल टाइपिंग या लिपिकीय त्रुटि थी। अदालत ने कहा कि यदि एक ही गलती सभी आधिकारिक दस्तावेजों में दोहराई गई है तो इसे साधारण क्लेरिकल एरर नहीं माना जा सकता।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

निचली अदालत के आदेश के खिलाफ मेघालय सरकार हाईकोर्ट पहुंची। राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार ने दलील दी कि सोनम रघुवंशी ने अपनी चौथी जमानत याचिका में यह साबित नहीं किया कि कथित प्रक्रियागत त्रुटि से उन्हें वास्तविक नुकसान हुआ।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में धारा 103 की जगह 403 लिखना मात्र टाइपिंग की गलती थी। इसके बावजूद आरोपी को यह पूरी तरह पता था कि उसे हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी मेमो, रिमांड आदेश और अन्य न्यायिक दस्तावेजों पर सोनम के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिससे स्पष्ट है कि उन्हें आरोपों की जानकारी थी।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम श्री दर्शन एवं अन्य (2025) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि प्रक्रियागत त्रुटि से वास्तविक नुकसान सिद्ध नहीं होता, तो केवल उसी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने उठाए कई सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर सभी दस्तावेजों में एक जैसी गलती बार-बार कैसे हुई। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेज एक तय प्रारूप (टेम्पलेट) पर तैयार किए गए प्रतीत होते हैं, जिससे प्रथम दृष्टया लगता है कि आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधारों की समुचित जानकारी नहीं दी गई।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि एक दस्तावेज में आरोपी को “सशस्त्र बलों से भगोड़ा (डेजर्टर)” तक दर्शाया गया था, जबकि इस मामले से उसका कोई संबंध नहीं था। इससे जांच प्रक्रिया की गंभीरता पर भी सवाल खड़े हुए।

सरकार बोली- आरोपी को सब पता था

एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने स्वीकार किया कि दस्तावेजों में टाइपिंग संबंधी त्रुटियां हुईं, लेकिन उन्होंने कहा कि आरोपी शुरू से वकीलों की सहायता ले रही थी और उसे अपने खिलाफ लगाए गए हत्या सहित सभी आरोपों की जानकारी थी।

उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रांजिट रिमांड, नियमित रिमांड, चार्जशीट और आरोप तय होने की प्रक्रिया के दौरान हर स्तर पर आरोपी को अपराध की जानकारी दी गई। साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जताई कि यदि जमानत जारी रही तो आरोपी के फरार होने की संभावना बनी रहेगी।

इस पर अदालत ने कहा कि जमानत की शर्तें स्पष्ट हैं और यदि उनका उल्लंघन होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

सोनम की ओर से रखा गया पक्ष

सोनम रघुवंशी की ओर से अधिवक्ता एल. थापा ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप राणा की सहायता से पैरवी की। बचाव पक्ष ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर कानूनी खामियां थीं, जिससे आरोपी के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए। हाईकोर्ट ने अंततः निचली अदालत के इसी निष्कर्ष को सही माना और जमानत बरकरार रखी।

क्या है पूरा मामला

राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी 12 मई 2025 को हुई थी। शादी के बाद दोनों 23 मई को हनीमून मनाने मेघालय गए, जहां से वे रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। दोनों को आखिरी बार नोंग्रियाट स्थित एक होमस्टे से चेक-आउट करते देखा गया था।

कुछ दिन बाद उनका किराए का स्कूटर सोहरा क्षेत्र में लावारिस मिला। 2 जून 2025 को पूर्वी खासी हिल्स जिले के वेइसॉवडोंग फॉल्स के पास गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ।

इधर सोनम करीब एक सप्ताह तक लापता रही और 8 जून को उत्तर प्रदेश के वाराणसी-गाजीपुर मार्ग स्थित एक ढाबे के पास मिली। इसके बाद मेघालय पुलिस ने जांच में दावा किया कि सोनम और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा ने मिलकर पहले से योजना बनाकर राजा की हत्या कराई थी।

पुलिस ने इस मामले में 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें हत्या की पूरी साजिश, आरोपियों की भूमिका और जुटाए गए साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। फिलहाल मुकदमे की सुनवाई जारी है, जबकि हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद सोनम रघुवंशी की जमानत यथावत रहेगी।

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