नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच हाल ही में हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव और नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों, संगठन की मजबूती और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तृत मंथन किया गया। साथ ही कई वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपने और विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को पंजाब और उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक भूमिका देने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश को भाजपा के लिए राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अभी से संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। बैठक में यह भी चर्चा सामने आई कि भाजपा के अनुभवी संगठनकर्ता सुनील बंसल उत्तर प्रदेश में अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों को जारी रख सकते हैं। इसके अलावा उन्हें मणिपुर में भी संगठन को मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक प्रभावी समन्वयक की भूमिका में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक गति देने के लिए उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं।
दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बीएल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू तथा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र प्रधान सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। आरएसएस की ओर से सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बैठक में भाग लिया। सूत्रों के अनुसार बैठक का फोकस केवल संगठनात्मक नियुक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा संगठन विस्तार की रणनीति पर भी व्यापक चर्चा की गई।
हालांकि पार्टी और आरएसएस की ओर से अभी तक किसी भी संभावित फेरबदल या नियुक्ति को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं, जिनका असर कई राज्यों की राजनीति पर देखने को मिलेगा।




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