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30 लाख की सनसनीखेज लूट का खुलासा: पूर्व कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड, रिटायर्ड आर्मीमैन सहित तीन आरोपी गिरफ्तार

इंदौर। शहर के पंढरीनाथ थाना क्षेत्र में कुछ दिन पहले एक मेटल फर्म के कलेक्शन एजेंट से दिनदहाड़े हुई 30 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। मामले की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि लूट की पूरी साजिश फर्म के ही एक पूर्व कर्मचारी ने रची थी। पुलिस ने इस मामले में रिटायर्ड आर्मीमैन चंद्रशेखर मुकाती सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में चंद्रशेखर को पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

सघन जांच के बाद खुली साजिश की परतें

घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न टीमों का गठन कर सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर संदेह की सुई फर्म के पूर्व कर्मचारी चंद्रशेखर मुकाती की ओर घूम गई। पुलिस ने जब चंद्रशेखर से पूछताछ की तो उसने मामले में अपने दो साथियों प्रवीण और अमर सिंह के नाम उजागर किए। इसके बाद पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को भी हिरासत में ले लिया।

अलग-अलग शहरों से जुड़े हैं आरोपी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी प्रवीण मूल रूप से उज्जैन का रहने वाला है, जबकि अमर सिंह भोपाल का निवासी बताया गया है। अमर सिंह के खिलाफ पहले से ही करीब आधा दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी राजस्थान भाग गए थे, जहां से वे लगातार संपर्क में बने हुए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि फरार रहने के दौरान चंद्रशेखर मुकाती अपने दोनों साथियों को पुलिस की गतिविधियों और मामले से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराता रहा।

पूर्व कर्मचारी होने का उठाया फायदा

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चंद्रशेखर मुकाती पहले संबंधित मेटल फर्म में कार्यरत था। नौकरी के दौरान उसे फर्म के कामकाज, नकदी के लेन-देन और कलेक्शन एजेंट की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने लूट की योजना तैयार की। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर ने फर्म के कलेक्शन एजेंट मनय उर्फ मुकेश अग्रवाल की कई दिनों तक रेकी करवाई। उसने यह जानकारी जुटाई कि एजेंट किस समय बड़ी राशि लेकर निकलता है, किन मार्गों का उपयोग करता है और उसके पास कितनी नकदी रहती है।

रेकी के बाद बनाई गई लूट की रणनीति

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पूरी वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। पहले कलेक्शन एजेंट की दिनचर्या और नकदी के आवागमन की जानकारी एकत्रित की गई। इसके बाद सुनियोजित ढंग से रास्ते में उसे निशाना बनाकर करीब 30 लाख रुपये की रकम लूट ली गई। वारदात के बाद आरोपी तुरंत शहर छोड़कर दूसरे राज्यों की ओर निकल गए ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। हालांकि तकनीकी साक्ष्यों और लगातार की गई जांच के चलते पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

लूटी गई रकम की बरामदगी पर फोकस

फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि लूट में इस्तेमाल किए गए संसाधनों, अन्य संभावित सहयोगियों और लूटी गई रकम के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि जल्द से जल्द पूरी राशि बरामद कर ली जाए।

पुलिस को मिल सकती हैं और अहम जानकारियां

जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों से पूछताछ में इस मामले से जुड़े कुछ और नाम भी सामने आ सकते हैं। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि वारदात की योजना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है तथा रिमांड लेकर मामले की आगे की जांच की जाएगी।

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