प्रदेशभर के नगरीय निकायों के पार्षद अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजे पत्र में उन्होंने तीन बड़ी माँगें रखीं-अविश्वास प्रस्ताव की अवधि 3 साल ही रहे, मानदेय बढ़े और स्वतंत्र पार्षद निधि लागू हो। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएँगे।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पार्षदों ने जताई नाराजगी, बोले- अधिकार छीनने का विरोध करेंगे, जनता के विकास पर न पड़े अंकुश
प्रदेशभर के नगरीय निकायों के पार्षदों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर तीन अहम माँग सामने रखी हैं। पार्षदों ने चेताया है कि यदि उनकी माँगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। पार्षदों का कहना है कि अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की अवधि और शर्तों में बार-बार संशोधन कर पार्षदों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। पहले यह अवधि 2 वर्ष थी जिसे 3 वर्ष किया गया, फिर बहुमत की शर्त 2/3 से बढ़ाकर 3/4 कर दी गई। अब इसे 4 वर्ष 6 माह करने का प्रयास हो रहा है, जिसे पार्षद अस्वीकार्य जता रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि यह कदम न केवल उन्हें सशक्त करेगा बल्कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास और भी मजबूत होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन बिंदुओं पर तुरंत विचार कर निर्णायक कार्रवाई करने की माँग की है।

और भी मजबूत होगा। जी से इन बिंदुओं पर तुरंत र्णायक कार्रवाई करने की कुल मिलाकर, पार्षदों की
यह एकजुट आवाज सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पर क्या रुख अपनाते हैं।




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