इंदौर शहर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में फरवरी महीने में 2 करोड़ की एमडी ड्रग्स पकड़ी थी। अब यही पुलिस कार्रवाई पुलिस के लिए चैलेंज बन गई है, क्योंकि पुलिस द्वारा जब्त की गई एमडी ड्रग विभाग की लेब जांच रिपोर्ट में यूरिया पाई गई है। यह खुलासा तब हुआ जब भोपाल स्थित राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब ने जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की गई। रिपोर्ट सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, अब मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जा रहा है। इंदौर शहर की तेजाजी नगर पुलिस द्वारा फरवरी महीने में की गई एमडी ड्रग्स की कार्रवाई के मामले में इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी लैब रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरवरी महीने में हुई इस कार्रवाई को शहर में बड़ी कामयाबी के रूप में पेश किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने दो करोड़ रुपये की एमडी ड्रग जब्त की है। साथ ही ड्रग सप्लाई के पीछे सक्रिय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। इसमें एक पुलिसकर्मी को भी आरोपी बना दिया गया था। हालांकि अब जांच रिपोर्ट ने पूरी कहानी को पलट कर रख दिया है। इस मामले में 26 फरवरी को तत्कालीन आईपीएस करणदीप सिंह के नेतृत्व में थाना तेजाजी नगर पुलिस ने कस्तूरबा ग्राम रोड पर चेकिंग के दौरान शाहरुख उर्फ पेट्रोल निवासी आजाद नगर और विजय पाटीदार निवासी मंदसौर को पकड़ा था। पुलिस ने दावा किया कि दोनों के पास से 198 ग्राम एमडी ड्रग मिली। इसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई गई। पूछताछ में शाहरुख ने यह भी कबूला कि वह मंदसौर से सस्ती ड्रग खरीदकर आजाद नगर में सप्लाई करता था। उसे स्थानीय सिपाही लखन गुप्ता का संरक्षण प्राप्त था। इस मामले में तेजाजी नगर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था और पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई थी। जिसके बाद तत्कालीन एसीपी करणदीप सिंह ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया गया था, जबकि कुछ को थानों से हटाकर लाइन अटैच किया था, हालांकि जब भोपाल की फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आई तो सारा मामला उलट गया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि जब्त किया गया पदार्थ कोई मादक ड्रग नहीं बल्कि पोटेशियम नाइट्रेट था जो कृषि उर्वरक, पटाखों और कुछ औद्योगिक उत्पादों में प्रयुक्त होता है। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस विभाग ने अपनी ही एफएसएल रिपोर्ट पर भरोसा न करते हुए कोर्ट से फिर से टेस्ट की अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने मंजूरी दे दी है। अब नमूनों को हैदराबाद स्थित केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा जाएगा। वहीं सेंपल भेजने के दौरान सेंपल बदलने की संभावना को लेकर पुलिस विभागीय जांच भी कर सकती है।
बाइट – राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी




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